मैं और मेरा मोबाइल – VastavNEWSLive.com


अक्सर तन्हाई में संवाद करते हैं।
वह बोलता नहीं,
फिर भी अनगिनत सवालों के उत्तर
चुपचाप मेरे सामने रख देता है।
जब कहीं कोई अच्छा विचार जन्म लेता है,
कोई प्रेरणादायी घटना दिखाई देती है,
किसी इंसान की नेक नियत,
किसी किसान का पसीना,
किसी मज़दूर की मेहनत,
किसी बच्चे की मासूम मुस्कान,
किसी पक्षी का मधुर गीत,
किसी वृक्ष की निस्वार्थ छाया,
या कुदरत का कोई अनमोल दृश्य
मैं उसे अपने मोबाइल में नहीं,
अपने हृदय में कैद कर लेता हूँ।फिर शब्दों का दीप जलाकर
उसे सोशल मीडिया के माध्यम से
जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ।
क्योंकि मेरा विश्वास है

“अच्छाई छिपाने की नहीं,
फैलाने की चीज़ होती है।”

जब कभी तन थक जाता है,
या मन उलझनों में घिर जाता है,
तब यह छोटा-सा मोबाइल
ज्ञान का एक द्वार बन जाता है।

किसी धार्मिक परंपरा का अर्थ समझना हो,
इतिहास की कोई कड़ी जोड़नी हो,
समाज की किसी समस्या का समाधान खोजना हो,
या किसी मासूम बच्चे के भोले प्रश्न का उत्तर देना हो
आज की आधुनिक ए.आई. भी
एक विनम्र सहयात्री बनकर साथ चलती है।

मुझे याद हैं वे दिन,
जब घर के बड़े-बुज़ुर्ग, गुरुजन और संत-महात्मा
जीवन की हर उलझन सुलझा देते थे।
आज भी उनका स्थान सर्वोच्च है।
मोबाइल और तकनीक
उनका स्थान नहीं ले सकते,
लेकिन यदि सही दिशा में उपयोग हों,
तो उनके बताए मार्ग को समझने का
एक सुंदर माध्यम अवश्य बन सकते हैं।

मैंने सीखा है
मोबाइल से बड़ा कोई नहीं,
और मोबाइल से छोटा भी कोई नहीं।
जिसने इसे समय नष्ट करने का साधन बनाया,
उसने स्वयं को खो दिया।
जिसने इसे ज्ञान, सेवा और मानवता का माध्यम बनाया,
उसने स्वयं को पा लिया।

आइए,
मोबाइल में केवल उँगलियाँ न चलाएँ,
विचार भी चलाएँ।
केवल तस्वीरें न भेजें,
संस्कार भी भेजें।
केवल समाचार न पढ़ें,
सत्य को भी समझें।
केवल आलोचना न करें,
समाधान भी खोजें।

यदि हमारी एक पोस्ट
किसी निराश व्यक्ति को आशा दे दे,
किसी युवा को सही दिशा दिखा दे,
किसी बच्चे को गुरु से जोड़ दे,
किसी परिवार में प्रेम बढ़ा दे,
या किसी मन में सेवा का दीप जला दे
तो समझिए,
हमारा मोबाइल नहीं,
हमारा जीवन सफल हो गया।

मोबाइल हाथ में है,
तो उसे ज्ञान का प्रकाश बनाइए।
सोशल मीडिया आपके पास है,
तो उसे मानवता की आवाज़ बनाइए।
तकनीक आपके साथ है,
तो उसे सेवा का साधन बनाइए।

क्योंकि समय बदलता रहेगा,
साधन बदलते रहेंगे,
लेकिन सत्य, सेवा, संस्कार और सद्विचार
यही मानव जीवन की सबसे बड़ी पहचान रहेंगे।

भुल-चुक की क्षमा  बख्शनी जी।

– राजेंद्र सिंघ शाहू
इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड
7700063999



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