आज का दिन जीओ… क्योंकि कल कोई नहीं जान पाया, कल का किसी को पता नहीं

आज का दिन जीओ… क्योंकि कल कोई नहीं जान पाया, कल का किसी को पता नहीं

मृत्यु… यह जीवन का अंतिम और अटल सत्य है।

हम जानकर भी इसे भूल जाते हैं।

हम सोचते हैं कि हमारे पास समय है…

हम सोचते हैं कि कल भी हम कहेंगे…

हम सोचते हैं कि कल हम अपने प्रियजनों से मिलेंगे…

हम सोचते हैं कि कल हम अपने सपनों को पूरा करेंगे…

लेकिन जीवन इतना सरल नहीं है। आज मै यह जब लिखने बैठा हूं तो एक अत्यंत दुखद दुर्घटना ने पूरे महाराष्ट्र और देश को झकझोर दिया है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजित दादा पवार का विमान बारामती में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उनके साथ विमान में सवार अन्य लोग भी इस हादसे में जीवन की धारा में विलीन हो गए।

वैसे मै राजनिती पर कभी बात नहीं करता, वह मेरा क्षेत्र नहीं है, मात्र आज की इस दुर्घटना ने सच में दुखी कर दिया.

हर घर में जैसे एक संतान जिद्दी होती है, थोड़ी सी अडीयल होती है, कुछ कर के दिखाऊं ऐसे महत्वाकांक्षी विचार की होती है, अजितदादा पवार एक ऐसे ही नेता थे जिनका नाम सेवा, समर्पण और मेहनत से जुड़ा था… उनके महत्वाकांक्षी स्वभाव से, स्पष्टवक्ता होने से जुडा था। वे एक ऐसे व्यक्ति थे जिसने जनसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया…

आज उसी जीवन की अनिश्चितता ने हम सबको एक सख्त सच से पुनः रूबरू कर दिया।

मुझे याद है मै एक बार बारामती के समिप ही किसी बडे फॅक्टरी को देखने गया था तो उस के मालिक ने कहा था की ये सारा फॅक्टरी, और कुछ व्यवसाय केवल दादा ने हिम्मत दी इसलिये कर पाया. मेरे जीवन पर दादा के बडे ऋण है, दादा कहेंगे तो मै अपना हाथ क्या अपनी गर्दन भी काटकर दे सकता हुं. इस तरह कि निष्ठा पाना ही अपने आप में यह जतलाता है कि किस तरह दादा, सामान्यो के साथ जुड़कर जिए. मात्र आज वे हमारे साथ नहीं है…

मनुष्य को कभी नहीं पता होता कि कल क्या होगा…

और इसी लिये आज को, इस क्षण को जीना सीखना चाहिए।

जीवन में हमें पथभ्रष्ट करने के लिये कारण बहुत मिल जाएंगे जैसे की मान-अपमान, मेरा-तेरा, ईर्ष्या, अहंकार, लालच और मोह, मत्सर और द्वेष मात्र इन सारे कारणों में अटक कर हम भूल जाते हैं कि—

जिन चीजों के लिये हम ‘अटके’ रहे, उन चीज़ों का कोई स्थायी अस्तित्व नहीं है। वे सब केवल क्षणभंगुर हैं। और क्षणभंगुर है हमारा जीवन।

विवाद, तेवर, तुलना, शिकायतें, सब अंत में हमारे दिल को सूना कर देती हैं। और जब हमारी उम्मीदें टूटती हैं, तो हमारे पास बस खालीपन रह जाता है।

मात्र ऐसा अक्सर कहा जाता है की मृत्यु के बाद भी जो साथ जाती है, वो बातें हैं… प्यार, इंसानियत, सच्चाई, रिश्तों की मिठास और हमारी यादें जो हम औरों के जीवन में छोड़ जाते हैं.

यह सब हमें मृत्युपर्यंत भी अलग नहीं करता।

तो मेरे दृष्टि में जीवन का असली अर्थ अगर कोई है तो वो बस आज में जीना, इस क्षण में जीना..

आपके पास महान दौलत है मात्र जीवन में अपनों का स्नेह ही नहीं है, तो क्या फायदा है?

आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन गये मात्र आपका साथ देने वाला कोई नहीं तो क्या फायदा है शक्तिशाली होने का?

आप बड़ी बड़ी बातें करते हैं, मात्र आपका दिल भीतर से सूना सूना है, तो क्या उपयोग है बड़ी बातों का?

एक गीत याद आता है, की

खबर नहीं पल की, रे मनवा बात करे कल की…

हम आज भी “कल” के बहाने तलाशते रहते हैं, कल वह करूँगा… कल यह करूँगा…

लेकिन… कल कौन पता हो भी या नहीं भी?

हमारा सारा कुछ एक पल में छिन जाता है।

आज, स्व. अजितदादा पवार के अकस्मात विदा होने की खबर ने हमें यही सिखाया है, आज ही जियो, इस क्षण में ही जीयो।

मेरी मानें तो…

रिश्तों को बचाइए, मन को हल्का रखिए।

माँ-पिता से दिल खोलकर बात करो।

कोई मित्र रुठा है तो अपना मन बड़ा कर लो, उन्हें मनाओ।

बड़े दिल से माफ करना सीखो, क्योंकि समय किसी का इंतज़ार नहीं करता।

सच कहूं तो हम अक्सर यह कहते हुए पाये जाते हैं कि ‘मैं बाद में कहूँगा…’

मात्र हम शायद ही जानते हैं कि वही ‘बाद में’ कभी आए या न भी आए?

इसलिये दोस्तो, संतोष, प्रेम, मानवता, भाईचारा, और अपनों के दिलों में हमारी अच्छी सुनहरी यादें — इन्हीं में सच्चा सुख समाया है।

आज सुबह जब दादा निकले होंगे तो न जाने कितने निश्चय, संकल्प, योजनाएं बनाकर निकले होंगे, कल देर रात तक न जाने कितनी रूपरेखाओं पर उन्होंने चिंतन किया होगा, मात्र एक क्षण ने सारा का सारा धरा का धरा रह गया…

इसलिये इस दुर्घटना से जो चिंतन मेरे मन में आया उसे आज ही लिख कर पोस्ट कर रहा हूं, दोस्त, आज को जियो, इस क्षण को जियो, पूरी तरह से, सच्चे दिल से।

महाराष्ट्र के श्रेष्ठ कवी, संत तुकाराम महाराज एक जगह लिखते हैं,

याजसाठी केला होता अट्टाहास। शेवटचा दिस गोड व्हावा।

जीवन सारा ऐसे जियो कि जब भी, जिस भी क्षण अंतिम सांस निकले बस वहीं जीवन का क्षण मीठा हो जाए, फिर चाहे वो जब हो…।

मेरे दोस्त, आज को, इस क्षण को, इस पल को स्नेह से जियो, बिना किसी शर्त के, न जाने कब अंतिम क्षण आ जाएं…।

भावपूर्ण श्रद्धांजली स्व. अजित दादा पवार

मनोज गोविंद पुरोहित,

नांदेड

 

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