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फाउंडेशन उठाएगी दोनों बेटियों की शिक्षा का खर्च
नांदेड़ (प्रतिनिधि) – बीड जिले के अंबाजोगाई की ४७ वर्षीय विधवा रमाबाई रणवीर ने अपनी बेटी की शिक्षा की फीस भरने के लिए मैराथन दौड़ में नंगे पैर दौड़कर पुरस्कार की राशि हासिल की थी। उनके इस आश्चर्यजनक संघर्ष और अतुलनीय साहस ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। व्यक्तिगत संकटों से जूझते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्होंने जो जिद दिखाई, वह हर माता-पिता के लिए बेहद प्रेरणादायक है। उनके इस अलौकिक संघर्ष को सम्मानित करने के लिए अवादा फाउंडेशन की ओर से नांदेड़ के एक कॉलेज में विशेष समारोह का आयोजन किया गया था। इस समारोह में रमाबाई को “अवादा नारी शक्ति सम्मान” प्रतीक चिह्न और पचास हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित किया गया।
इस सराहनीय पहल के साथ ही अवादा फाउंडेशन ने रमाबाई के परिवार को मजबूत संबल देने का निर्णय लिया है। उनकी बड़ी बेटी आरती नांदेड़ में बी.एससी. की पढ़ाई कर रही है, जबकि पूजा पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही है। इन दोनों बेटियों के आगे के पूरे शैक्षणिक खर्च और आवश्यक मार्गदर्शन की जिम्मेदारी फाउंडेशन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार की है।
इस अवसर पर बोलते हुए अवादा फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने कहा, रमाबाई जी का संघर्ष केवल एक माँ के प्यार की कहानी नहीं है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार न मानने वाली अखंड महिला शक्ति का प्रतीक है। प्रगति के लिए शिक्षा, सशक्तिकरण और प्रयास आवश्यक हैं। अपने बच्चों को शिक्षा के माध्यम से बेहतर जीवन मिले, रमाबाई जी की इस जिद और सपने का साथ देते हुए हमें गर्व महसूस हो रहा है। भविष्य में भी दोनों बेटियों की आवश्यकता के अनुसार उन्हें हर संभव शैक्षणिक और मार्गदर्शन सहायता अवादा फाउंडेशन की ओर से लगातार दी जाएगी।
रमाबाई की इस साहसी यात्रा को मिले इस साथ ने समाज में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया है। अवादा फाउंडेशन की इस पहल से दोनों बेटियों के सपनों को अब नए पंख मिल गए हैं।
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