तुकाराम मुंडे और महाराष्ट्र का दूध मिलावट घोटाला: एक विस्तृत रिपोर्ट
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंडे द्वारा दूध मिलावट माफियाओं के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई ने राज्य में एक बड़े केमिकल मिल्क रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह घोटाला न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा था, बल्कि इसके तार राजनीति के गहरे गलियारों तक जुड़े हुए हैं।
केमिकल दूध बनाने का घातक तरीका
इस घोटाले का सबसे भयावह पहलू वह तरीका है जिससे यह नकली दूध तैयार किया जा रहा था। जांच में पाया गया कि मिलावटखोर दूध पाउडर में घातक रसायनों, शैम्पू, डिटर्जेंट और तेल का उपयोग करके सिंथेटिक दूध बना रहे थे। इस नकली दूध को बनाने की लागत मात्र 16 से 17 रुपये प्रति लीटर आती थी, जिसे वे डेयरी संचालकों को 38 से 40 रुपये के भाव पर बेचते थे। इस अवैध कारोबार में किसान, डेयरी चालक और कुछ बड़े पाउडर प्लांट मालिकों की संलिप्तता होने की संभावना जताई गई है।
घोटाले का व्यापक पैमाना
महाराष्ट्र में प्रतिदिन लगभग दो करोड़ लीटर दूध का संकलन होता है। इसमें से लगभग 40 से 45 लाख लीटर दूध पाउच के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचता है, जबकि बाकी का उपयोग दूध पाउडर और अन्य डेयरी उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है। मुंडे की कार्रवाई के बाद राज्य में दूध संकलन के आंकड़ों में चौंकाने वाली गिरावट देखी गई है। कार्रवाई शुरू होने के बाद दूध संकलन में 30% से 35% की कमी आई है, जिसका अर्थ है कि जो संकलन दो करोड़ लीटर था, वह घटकर लगभग 1.60 से 1.70 करोड़ लीटर रह गया है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि राज्य में कितना बड़ा हिस्सा केवल मिलावटी और नकली दूध का था।
मुख्य केंद्र और मास्टरमाइंड
इस रैकेट के प्रमुख केंद्र अहमदनगर, पुणे (आंबेगाव, जुन्नर, खेड़) और सोलापुर जिले का माळशिरस (विशेष रूप से पिलिव गांव) पाए गए हैं। पुणे जिले के मंचर के पास अवसारी बुद्रुक में नवकार डिस्ट्रीब्यूटर्स नामक फैक्ट्री इस घोटाले का मुख्य अड्डा थी।
- सुशांत बबनराव हिंगे: इसे इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना गया है।
- संदीप लोढ़ा: यह इस सिंडिकेट में सलाहकार के रूप में कार्य कर रहा था। लोढ़ा पर पहले भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन वह साक्ष्यों के अभाव में बच निकला था, जिसकी अब दोबारा जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई में पुणे जिले के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल और क्राइम पीआई प्रमोद क्षीरसागर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्रवाई के दायरे में आई प्रमुख डेयरियां
अब तक लगभग 13 प्रमुख डेरियों और चिलिंग सेंटरों पर कार्रवाई की गई है, जिनमें शामिल हैं:
- मे. नवकार डिस्ट्रीब्यूटर्स (अवसारी बुद्रुक)
- मे. हेमंत कॉर्पोरेशन (अकलूज)
- पीरसाई मिल्क (आंबेगाव)
- भैरवनाथ मालवडी (दौंड)
- जय श्रीराम डेयरी (पिंपळगाव खडकी)
- मातोश्री दूध डेयरी (जालना)
- सोनू उर्फ चैतन्य घोरपडे (पिलिव, माळशिरस)
- मे. डेली विश्रो डेयरी (पिलिव)
- गुरुदत्त दूषितकरण केंद्र (कडूस, खेड़)
- सह्याद्री डेयरी (शिरूर)
- इंदापुर मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट्स लिमिटेड (सोनाई सेंटर, पिलिव)
अकेले माळशिरस के पिलिव गांव की चार डेयरियां इस सूची में शामिल हैं, जो इस क्षेत्र में मिलावट की गंभीरता को दर्शाती हैं。

राजनीतिक सांठगांठ और दबाव
इस घोटाले के तार सीधे राजनीति से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। एक विशेष घटना में, बीड जिले के एक विधायक की पत्नी ने एक दूध पाउडर प्लांट के मालिक को धमकी देकर कम गुणवत्ता वाला और मिलावटी दूध स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। विडंबना यह है कि वही विधायक सार्वजनिक रूप से तुकाराम मुंडे की कार्रवाई का समर्थन कर रहे थे और उनकी बदली न करने की मांग कर रहे थे। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, महाराष्ट्र के कई बड़े राजनेता, जो दूध पाउडर प्लांट चलाते हैं, जांच के घेरे में आ सकते हैं।
किसानों और जनता पर प्रभाव
तुकाराम मुंडे की इस कठोर कार्रवाई का सकारात्मक प्रभाव किसानों पर भी पड़ा है। डेयरी व्यवसायी प्रकाश कुतवळ के अनुसार, जब से मिलावटी दूध पर रोक लगी है, असली दूध की मांग बढ़ गई है, जिससे किसानों को मिलने वाले दूध के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। मिलावटी दूध का प्रवाह कम होने से बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लौटी है। इस कार्रवाई से खुश होकर कई जगहों पर किसानों ने मुंडे की तस्वीरों पर दूध चढ़ाकर (दुग्धाभिषेक) अपना समर्थन व्यक्त किया है।

निष्कर्ष
तुकाराम मुंडे की यह मुहिम केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और मिलावट के खिलाफ एक बड़ा युद्ध है। जहां एक ओर अपराधी जेल की हवा खा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को शुद्ध दूध मिलने की उम्मीद जगी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह जांच उन शक्तिशाली राजनीतिक चेहरों तक पहुँच पाती है जो इस जहरीले कारोबार को संरक्षण दे रहे थे।
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