अमेरिका की युद्धनीति और कानून को दरकिनार करने वाली चालबाजी – VastavNEWSLive.com
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहाँ रणनीतिक दांव-पेचों से अधिक कानूनी धोखाधड़ी और चालबाजी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। स्रोतों के अनुसार, अमेरिका ईरान के खिलाफ एक नए सैन्य अभियान, ऑपरेशन स्लेज हैमर (Operation Sledgehammer) की तैयारी कर रहा है, जो न केवल युद्ध को लंबा खींचने की एक कोशिश है, बल्कि अपने ही देश के लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय नियमों को ठेंगा दिखाने जैसा है,।
कानूनी तोड़ और 60 दिनों का फंडा
इस पूरी चालबाजी की जड़ अमेरिका के आंतरिक सैन्य कानूनों में छिपी है। अमेरिकी कानून के अनुसार, राष्ट्रपति किसी भी सैन्य ऑपरेशन को केवल 60 दिनों तक ही बिना संसद (कांग्रेस) की अनुमति के चला सकते हैं। यदि ऑपरेशन इस अवधि से आगे बढ़ता है, तो उसे आधिकारिक तौर पर युद्ध घोषित करना पड़ता है, जिसके लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होती है,।
स्रोतों से पता चलता है कि ट्रंप प्रशासन इस समय अपनी ही कांग्रेस में फंसा हुआ है। पूर्व में चलाए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) की समय सीमा समाप्त हो रही थी, इसलिए अब इस ऑपरेशन का नाम बदलकर स्लेज हैमर रखने पर विचार किया जा रहा है,। नाम बदलने का मुख्य उद्देश्य 60 दिनों की युद्ध शक्ति अवधि को पुनः शुरू करना है, ताकि ट्रंप को बिना किसी संसदीय अनुमति के ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यवाही जारी रखने का मौका मिल सके। यह सीधे तौर पर कानून को तोड़ने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को चकमा देने का एक खतरनाक फंडा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: एक नया बहाना
अमेरिका की इस चालबाजी का एक और पहलू यह है कि वह अब सीधे ईरान पर हमले के बजाय अपना ध्यान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर केंद्रित कर रहा है। पेंटागन का तर्क यह हो सकता है कि वे ईरान पर हमला नहीं कर रहे, बल्कि होर्मुज क्षेत्र में सैन्य अभियान चला रहे हैं। यह एक ऐसा कानूनी तोड़ है जिसे अमेरिका अपने हस्तक्षेप को उचित ठहराने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
हकीकत यह है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति अब युद्ध की शुरुआत की तुलना में कहीं अधिक है,। इसमें अतिरिक्त कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और भारी सशस्त्र संसाधन शामिल हैं। अमेरिकी सेना होर्मुज में इस कदर फंस चुकी है कि वे इसे खोलने में असमर्थ रहे हैं, जिसके कारण पूरी दुनिया से समर्थन की गुहार लगाई गई, लेकिन किसी भी देश ने इसमें शामिल होने की हिम्मत नहीं दिखाई,।
वेनेजुएला और 51वां राज्य: विस्तारवादी मानसिकता
अमेरिका की चालबाजी केवल ईरान तक सीमित नहीं है। ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल ट्रुथ प्लेटफॉर्म पर एक नक्शा साझा किया, जिसमें वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य दिखाया गया है। रशियन टीवी (RT) की रिपोर्ट के अनुसार, यह वेनेजुएला पर पूर्ण कब्जे की तैयारी की ओर इशारा करता है। यह दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों को ताक पर रखकर संसाधनों से संपन्न देशों पर अपना झंडा फहराने की विस्तारवादी नीति पर चल रहा है।

आंतरिक कलह और मीडिया पर राजद्रोह का आरोप
अमेरिका की इस युद्धनीति का एक बड़ा हिस्सा सूचना युद्ध (Information War) भी है। राष्ट्रपति ट्रंप अपनी ही देश की मीडिया पर भड़के हुए हैं। जब अमेरिकी मीडिया ईरान की सैन्य सफलता या अमेरिका की चुनौतियों के बारे में सच लिखती है, तो ट्रंप उसे राजद्रोह (Treason) और दुश्मन की मदद करना करार देते हैं。 ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान की नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, लेकिन सच्चाई यह है कि अमेरिकी जहाज अभी भी होर्मुज में घुसने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं,। यह विरोधाभास अमेरिकी जनता और दुनिया को गुमराह करने की एक सोची-समझी चाल है।

चीन का रुख और वैश्विक प्रभाव
अमेरिका की इन चालबाजियों के बीच चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के दौरान उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी; यहाँ तक कि शी जिनपिंग उन्हें लेने हवाई अड्डे तक नहीं आए। जहाँ एक तरफ अमेरिका नाकाबंदी की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ चीनी और कतरी तेल टैंकरों को होर्मुज से निकलने की अनुमति दी जा रही है, जो अमेरिकी प्रभाव के घटने का संकेत है। इसके जवाब में ईरान ने भी कानूनी रास्ता अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court) में अमेरिका की जोर-जबरदस्ती के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, ऑपरेशन स्लेज हैमर केवल एक सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी प्रशासन की उस मानसिकता का प्रतीक है जो अपनी युद्ध पिपासा को शांत करने के लिए अपने ही कानूनों को मरोड़ने से भी गुरेज नहीं करती। 60 दिनों की अवधि को बार-बार रीसेट करना, सैन्य ऑपरेशन का नाम बदलना और दूसरे देशों की जमीन को अपना राज्य घोषित करना ये सभी वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरे हैं। अमेरिका की यह युद्ध शुरू करने की चालबाजी न केवल ईरान को अस्थिर कर रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जड़ों पर भी प्रहार कर रही है।

