नरेंद्र मोदी ने हस हस कर भ्रष्टाचार के आरोप किये वही आज पश्चिम बंगाल के सीएम
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युगांतरकारी बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। इस शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही बंगाल की राजनीति के नए रुझान और भविष्य की तस्वीरें स्पष्ट होने लगी हैं। यह समारोह न केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक था, बल्कि इसमें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने इसे एक बड़ा राजनीतिक संदेश बना दिया।
प्रधानमंत्री का नतमस्तक होना और साष्टांग प्रणाम शपथ ग्रहण के मंच पर सबसे चर्चित दृश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर आकर जनता के सामने घुटने टेक दिए और सिर झुकाकर साष्टांग प्रणाम किया। इस दृश्य को जनता जनार्दन के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि वर्षों की सत्ता के बाद जनता को वास्तव में क्या मिला है। समारोह में भाजपा और एनडीए शासित राज्यों के 20 से अधिक मुख्यमंत्री मौजूद थे, जो भाजपा की देशव्यापी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे थे।
शुभेंदु अधिकारी और भ्रष्टाचार के पुराने आरोप शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुछ पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल होने लगे हैं। इन वीडियो में प्रधानमंत्री स्वयं शुभेंदु अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे थे। विशेष रूप से 2016 का एक वीडियो चर्चा में है, जिसमें मोदी जी बंगाल के भीतर शुभेंदु अधिकारी को निशाना बना रहे थे और उनके कुर्ते की जेब में पैसे डालने की शैली पर तंज कस रहे थे। विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस ने इन वीडियो को साझा करते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस का तर्क है कि जिस व्यक्ति को प्रधानमंत्री ने खुद सबसे भ्रष्ट बताया था, आज उसे ही मुख्यमंत्री बना दिया गया है। वायरल वीडियो में मोदी जी को यह कहते सुना जा सकता है कि टीवी कैमरे के सामने किस तरह पैसे लिए जा रहे थे और चेहरा कितना ‘भोला-भाला’ लग रहा था। आज वही प्रधानमंत्री शुभेंदु अधिकारी को गले लगा रहे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में नैतिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बंगाल में राजनीतिक अशांति और ममता बनर्जी का घर शपथ ग्रहण के शुरुआती घंटों के भीतर ही बंगाल में तनाव की तस्वीरें सामने आने लगीं। ऐसी खबरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें ममता बनर्जी के घर के बाहर हुड़दंग किया जा रहा है। सागरिका घोष ने एक वीडियो साझा करते हुए कोलकाता पुलिस को टैग किया और चिंता जताई कि जो महिला 15 साल तक मुख्यमंत्री रही, अगर वह भी सुरक्षित नहीं है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का क्या होगा। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच जिस तरह का नजारा बंगाल में देखा गया, वह भविष्य में होने वाली राजनीतिक उठापटक का संकेत दे रहा है।

भाजपा की विभीषण रणनीति और नेताओं का दलबदल सूत्रों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी को भाजपा में शामिल करने के पीछे मुख्य उद्देश्य ममता बनर्जी के किले को अंदर से ढहाना था। भाजपा ने उन्हें एक ऐसे मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जिसने पार्टी को अंदर से कमजोर किया और बड़े नेताओं को बाहर निकालने में मदद की। भाजपा की इस रणनीति को विभीषण मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ दूसरी पार्टियों के कद्दावर नेताओं को अपनी ओर खींचकर सरकार बनाई जाती है। यह केवल बंगाल तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया, उत्तर प्रदेश में जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह, और महाराष्ट्र में अजीत पवार इसके बड़े उदाहरण हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री ने पूर्व में अजीत पवार की पार्टी को नेचुरली करप्ट पार्टी कहा था, लेकिन बाद में उन्हें अपने साथ मिला लिया। भाजपा के लिए नैतिकता से ऊपर सत्ता और सरकार बनाना सर्वोपरि दिखाई देता है।
नेताओं के बीच का गाढ़ा प्रेम और योगी आदित्यनाथ का प्रभाव शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने जिस गर्मजोशी से शुभेंदु अधिकारी को गले लगाया, उसकी तुलना भाजपा के अन्य खाटी नेताओं (जैसे शिवराज सिंह चौहान या भजन लाल शर्मा) से की जा रही है। यह देखा गया कि शुभेंदु के प्रति जो गाढ़ा प्यार शीर्ष नेतृत्व ने दिखाया, वह भाजपा की अपनी नर्सरी से निकले नेताओं के लिए भी कम ही देखने को मिलता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी एक अलग छाप छोड़ी। उन्होंने शुभेंदु को भगवा पटका पहनाया और महफिल की सुर्खियां बटोरीं। योगी आदित्यनाथ के ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे से हटकर दिए गए बयानों ने भी चर्चा छेड़ी, जहाँ वे उन लोगों के साथ होने की बात करते हैं जो उनके साथ हैं।
विपक्ष का प्रहार: चकाचौंध के पीछे की कड़वी हकीकत जहाँ एक तरफ भाजपा जश्न मना रही है, वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने तीखे आंकड़ों के साथ भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकसित भारत की गुलाबी तस्वीरों के पीछे देश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए कुछ आंकड़े चौंकाने वाले हैं:देश के 1,19,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में बिजली का कनेक्शन नहीं है।
- लगभग 99,000 स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जिसके कारण लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं।
- 61,000 से अधिक स्कूलों में तो एक भी शौचालय नहीं है।
- 14,505 स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।
- 1,44,000 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं जहाँ पूरे स्कूल में सिर्फ एक ही शिक्षक है।
- 2014 के बाद से अब तक 94,000 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।
सुप्रिया श्रीनेत का तर्क है कि भाजपा सरकार शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय हिंदू-मुसलमान और ध्रुवीकरण की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करती है। उन्होंने जनता से सवाल किया कि क्या वे सत्ता की चाबी उन लोगों को सौंपने के लिए तैयार हैं जो बच्चों के भविष्य के प्रति सजग नहीं हैं।

निष्कर्ष शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ है। एक तरफ भाजपा इसे अपनी बड़ी जीत और विकास के नए युग के रूप में देख रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के साथ समझौते और लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अब किस तरह से वापसी करेगी और बंगाल की सड़कों पर शुरू हुई यह राजनीतिक जंग क्या मोड़ लेगी, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, बंगाल एक बड़े बदलाव और भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
